हिंदी ऐच्छिक-12वीं कक्षा-सुमिरिनी के मनके प्रश्नोतर
अंतरा कक्षा-12वीं हिंदी (ऐच्छिक)
सुमिरिनी के मनके
घड़ी के पुर्ज़े
लघु प्रश्नोतर -CBSE के नवीन पाठ्यक्रम पर आधारित
1-धर्म के रहस्य को कौन जानने की कोशिश न करें?
उत्तर-प्रत्येक मनुष्य
2-धर्म के विषय में साधारण मनुष्य क्या करें?
उत्तर- कान ढलका कर सुन ने।
3-कान ढलका कर का क्या अर्थ है?
उत्तर-कान खोलकर सुनना।
4-इस मत के समर्थन में किसका उदाहरण दिया जाता है?
उत्तर- घड़ी का।
5-घड़ी किस काम आती है?
उत्तर- समय बताने के।
6-साधारण व्यक्ति से क्या नहीं होगा?
उत्तर-घड़ी को खोल कर उसके पुर्ज़े लगाना।
7-घड़ी के पुर्ज़े लगाने का अधिकारी कौन नहीं है?
उत्तर-साधारण व्यक्ति।
8-धर्म के विषय में जानने का अधिकार किसको है?
उत्तर-वेदशास्त्रज्ञ व धर्माचार्यों का।
9-किस कार्य मे जन्म व कर्म की पख न लगाएं?
उत्तर-घड़ी देखने में।
10-लेखक घड़ी ठीक करने के लिए किसे नहीं देने की बात कहते है?
उत्तर-अनाड़ी को।
11-लेखक के अनुसार घड़ी ठीक करने को किसे देना चाहिए?
उत्तर-उस व्यक्ति को जो घड़ीसाज़ी का इम्तहान पास करके आया है।
12-लेखक को किन लोगों पर शक होता है कि उन्हें घड़ी ठीक करना आता है भी के नहीं?
उत्तर-उन्हें जिन्हें इस कार्य को करने का अधिकार उनकी कबिलितत नहीं बल्कि उनके परदादा के कारण मिला है।
13-कहानी का मोलभाव क्या है?
उत्तर-मनुष्य धर्म के विषय में चुपचाप सुने उसके रहस्य को जानने का प्रयास ना करें।
14-धर्माचार्य साधारण व्यक्ति को धर्म का रहस्य जानने से क्यो रोकते है?
उत्तर-लेखक के अनुसार धर्माचार्यों को स्वयं धर्म का रहस्य नहीं मालूम इसलिए दूसरों को भी जानने से रोकते हैं।
15-दृष्टांत का क्या अर्थ है?
उत्तर-उदाहरण।
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